जगदीप धनकड़ इस्तीफा, जाटों का अपमान ! नीतीश बनेंगे उपराष्ट्रपति
जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके पीछे उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया। धनखड़ ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कि स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सा सलाह का पालन करने के लिए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं, यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है, लेकिन इसके पीछे राजनीतिक मायने तलाशे जा रहे हैं। कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने इसे भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की जनतांत्रिक पद्धति में अविश्वास और मनमाने निर्णयों से जोड़ा है। उन्होंने पीठासीन व्यक्ति के अपमान और जेपी नड्डा के बयान का जिक्र किया। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से संसदीय कार्यमंत्री व स्वयं नड्डा का अनुपस्थित रहना भी कई सवाल खड़े करता है।
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नड्डा को लेकर क्या थ्योरी चल रही है?
अब विपक्ष के पास अपनी एक थ्योरी इस समय तैयार है। उस थ्योरी के आधार पर ही वो धनखड़ के इस्तीफे के बाद नड्डा को निशाने पर ले रहे हैं। यह पूरा विवाद सोमवार को शुरू हुए मानसून सत्र से जुड़ा हुआ है। असल में राज्यसभा में जेपी नड्डा की विपक्षी सांसदों के साथ कहासुनी हुई थी। संसद की कार्यावही के दौरान क्योंकि विपक्ष लगातार हंगामा कर रहे थे, ऐसे में जेपी नड्डा ने दो टूक कहा था- मैं जो बोल रहा हूं, वहीं ऑन रिकॉर्ड जाएगा, बाकी कुछ नहीं जाएगा। अब इसी बयान को विपक्ष ने एक बड़ा मुद्दा बना लिया है।
विपक्ष के नेताओं का तर्क है कि जेपी नड्डा ने इस बयान से सीधे-सीधे चेयर का अपमान किया है। विपक्ष ही इस थ्योरी को भी बल दे रहा है कि इसी वजह से जगदीप धनखड़, जेपी नड्डा से खफा हो गए थे। इसके ऊपर इस समय खबर यह भी है कि बिजनेस एडवाइजरी की जो मीटिंग सोमवार शाम को होनी थी, उसमें जेपी नड्डा ने हिस्सा नहीं लिया। विपक्ष ने इसे भी मुद्दा बना लिया है, वो भी इसे भी धनखड़ की नाराजगी और अपमान से जोड़कर देख रहा है। यह अलग बात है कि इस विवाद पर अब खुद जेपी नड्डा ने सफाई पेश की है।


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